Sunday, 20 November 2016

इंडोनेशिया को जानने की दिशा में


Indonesia - how would you find it. An overall glimpse!

पिछले साल मै इंडोनेशिया पाँच बार गया । इसकी संस्कृति और लोगों को समझने की कोशिश यहाँ लिखी जा रही है । आम भारतीय नज़रिये में इंडोनेशिया कोई बड़ा पर्यटक, व्यापारिक या सांस्कृतिक देश के रूप में प्रसिद्ध नहीं है । इतना ही कहूँगा कि - जानने लायक और व्यापार की दृष्टि से भी बहुत उपयुक्त है ।

इंडोनेशिया देखने में भारत जैसा लगता है ।



सड़के एक दम भारत जैसी - बहुत चौड़ी नहीं, किनारों में गडढे, गड्ढों में पानी । लोग अपने काम से मतलब रखने वाले और मददगार, लेकिन भाषा की समस्या । अग्रेज़ी की लिपि में लिखी स्थानीय भाषा को बहासा कहते हैं । सड़को के किनारों की दुकानों की चीज़ों/उत्पादों में सर्विस करने वालों का अनुपात भारत के छोटे शहरों जैसा ही । लेकिन सड़कों पर भारत के मध्यम आकार के शहरों से अधिक भीड़ नहीं दिखती । सिग्नल पर लोग रुकते हैं - स्वेच्छा से, वर्दी वालों के डर से नहीं । लड़कियों की सुरक्षा भारत से कहीं अधिक ।

Indonesia का नाम और पेड़-पौधे भी भारत की तरह लगते हैं । जहाँ सोलहवीं सदी में भारत के जैसी संस्कृति के कारण इसका नाम इंडोनेशिया रखा गया था - आज सिर्फ़ देखने में भारत की तरह है । पेड़ो में केला, पपीता, नारियल, बांस, आम इत्यादि भारत की  याद दिलाते हैं तो और भी कुछ वृक्ष और झाड़ियाँ हैं जो भारत से थोड़ी अलग दिखती हैं ।

पर्यटक द्वीपों पर पूरी relaxed feeling आती है ।


भारत से अलग जो चीजें हैं उनमें - गलियों में गंध (चिकन के चमड़ी लगे खाने की) और संगीत में ढिन-चिन की बहुत सरल और पकाने वाली आवृत्ति । जहाँ भारत में शाकाहारी खाना ढूंढना बिल्कुल भी मुश्किल का काम नहीं - चाहे केरल में ही क्यों न हो - यहाँ थोड़ा मशक्कत करनी पड़ती है । अक्सर तो आलू-चिप्स के पैकेट भी मछली के flavour में आते हैं ।

सबसे आम खाना - नासी गोरेंग यानि Fried Rice

बोली - Bahasa

मलय अख़बार एनालिसा (विश्लेषण)

बहासा को बोलना तो थोड़ा मुश्किल है, लेकिन समझने के लिये एक छोटा प्रयास आपके लिए मददगार साबित हो सकता है । आधुनिक बहासा में, मूल मलय के अलावे ११वीं सदी के संस्कृत, १६वीं सदी के अरबी और १९वीं सदी के डच प्रभाव को ध्यान में रखें । कहीं पर राजा, रसा और बहाया जैसे शब्द संस्कृत मूल के हैं । या Selamat Datang में सेलामत अरबी मूल का है । इसी प्रकार डच मूल के शब्दों पर अंग्रेज़ी से संबंध डाल कर ध्यान दें । Station को stasiun या Information - Informasi जैसे शब्दों पर ध्यान दें । इसी तरह Orange Juice को Jus Oran लिखा पाएंगे ।


बाज़ार-व्यापार


इंडोनेशिया एक कम विकसित देश लगता है । जटिल चीज़ों में शायद ही किसी का निर्माण यहाँ होता हो । गाड़ियों में होन्डा, टोयोटा, मित्सुबिशी का वर्चस्व तो टीवी-वीडियों में भी जापान-कोरिया छाया हुआ । जापानी नाम और गुणवत्ता को टक्कर देना अभी भारतीयों के लिए, वो भी अपने देश से दूर तो बहुत मुश्किल होगा ।

व्यापार के नज़रिये से जो चीज़ सबसे आकर्षक लग सकती है वो है खाने की चीज़े । जी हाँ, हल्दीराम हो या वड़ा-पाव यहाँ के लोगों को बहुत रास आएगा, ऐसा लगता है । बस थोड़ा मांसाहारी बनाकर पेश कीजिये - जैसे नमकीनों में मछलियों के फ्लेवर या वड़ा-पांव में चमड़ी लगी चिकन के टुकड़े । ऐसा कहने के दो कारण हैं - यहाँ का अपना खाना काफ़ी रसहीन है । और यहाँ मसाले स्थानीय रूप से उगाए जाते हैं ।

पिछले कुछ सालों (४-५) में यहाँ की अर्थव्यवस्था बढ़कर फिर से सुस्त हुई है । एशियन विकास बैंक की इस रिपोर्ट में यहाँ के वित्तीय व्यवस्था में बहुत संभावनाएँ देखी गई हैं, लेकिन इनका समुचित इस्तेमाल नही हो पा रहा है । यहाँ पेट्रोलियम सही मात्रा में है । लेकिन थोड़े complex मशीनों या सामानों का निर्माण नहीं होता, उन्हे बाहर से मंगाया जाता है ।

इस कारण से अगर मान लीजिये कि आपको गैस टरबाइन, कोई laboratory testing equipment जैसे yield stress मापने वाली मशीन या बच्चों के लिए नए ढंग के खिलौने जैसी चीज़ बनानी आती है तो इनको बनाकर बेच सकते हैं । सारा कच्चा सामान यहीं मिल जाएगा - पेट्रोलियम, खनिज और सस्ते श्रमिक । ध्यान रखिये कि मलेशिया, दुबई और सिंगापुर में  शायद सबसे अधिक श्रमिक यहीं से आते हैं । और एक ग्रामीण बाज़ार देखकर आप सोच सकते हैं कि यहाँ और किन चीज़ों की ज़रूरत है:
 स्थानीय बाज़ार सुविधाओं से लैश नहीं 


ऐसा लगता है कि इंडोनेशिया में महसूस करने को बहुत कुछ है, लेकिन सबकुछ लिखा नहीं जा सकता । इसलिए फिर कभी । अधिक जानकारी के लिए Bintan, Toba (Sumatera), Surabaya के वृत्तांत देखें । घूमिये, और अंग्रेज़ी ना बालने वाले देशों में भी अच्छे लोग होते हैं - इसका एहसास लीजिये । जाते-जाते एक बुद्ध प्रतिमा जिसके बारे में अरबी लिपि में बोर्ड लगा है -


अरबी लिपि में बुद्ध प्रतीक का वर्णन - स्वात और बमयान के तालिबान से कितना अलग!

Tuesday, 21 June 2016

Southern India 2 - central Tamil Nadu

A few places and culture in southern India -  Central Tamil Nadu.

दक्षिण भारत में ४ दिनों का एक टन  - मध्यवर्ती तंजौर और आसपास - कुंभकोणम्, नागापट्टिणम, वेलंकण्णी और त्रिचुरापल्ली । इन इलाकों से कावेरी नदी बहती है और धार्मिक रूप से आकर्षण का केंद्र रही है । इस जिले के ग्रामीण इलाकों की कुछ तसावीर -



तंजौर जिले के ग्रामीण इलाक़े
तंजावुर जिले में कोई २५०० मंदिर हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध है बृहदेश्वर मंदिर । स्थानीय भाषा में इसे पेरिया कोविल (बड़ा मंदिर) भी कहते हैं और ब्रिगद्देश्वरा भी ।

रात की धुंधली रोशनी में बृहद्देश्वर मंदिर - ११वीं सदी में बना शिव मंदिर



आगे बढ़ने से पहले इलाके के बारे में - यह मदुरै और चेन्नई के बीच आता है। रास्ते के आसपास के नगरों का विवरण यहाँ देखिये -
नागापट्टणम औक कुंभकोणम् का रास्ता

तंजावुर


तंजावुर शहर मध्यम आकार का है, लेकिन शांत है । सड़के मारा-मारी और हॉर्न से विहीन तो नहीं, लेकिन परेशान नहीं दीखतीं । अप्रील की शुरुआत में बहुत गर्म । बृहदेश्वरा शहर के एक छोर पर बसा है, यहीं नया बस स्टैंड भी है ।


तंजावुर महल के म्यूज़ियम भी बहुत अच्छे हैं । सरस्वती महल लाइब्रेरी भी अच्छी है ।
तंजावुर के नायक राजाओं के महल की सजावट
तंजावुर नायक महल (१५३०-१७३०) के बीच के राजाओं का महल था । इसके अंदर की सरस्वती लाइब्रेरी में तमिळ और मराठी के लिखे धार्मिक और ऐतिहासिक साहित्य मिलते हैं । इसके संग्रहायल में एक नायक राजा के आदेश पर चारों वेदों को मिलाकर बनी एक पुस्तकाकार संहिता भी मिलती है । इसके पन्ने एक अख़बार के आधे हैं और इसमें कोई २००० पन्ने दीखते हैं जो देवनागरी लिपी में संस्कृत में लिखी है ।

महल का घंटाघर


तंजावुर की ज़िला लाइब्रेरी ।


तंजावुर की ज़िला लाइब्रेरी - अप्रील की गर्मी में

कुंभकोणम


कुंभकोणम शहर भर में कोई १०० मंदिर होंगे । सबसे प्रसिद्ध है नवग्रह मंदिर जो शहर के आसपास २५ किमी में अलग-अलग दिशाओं में बने हैं । जैसा कि नवग्रह मंदिरों में अक्सर होता था - ये एक दूसरे से एक अष्टकोण के आकार में अवस्थित होते थे ।


कुंभकोणम के प्रसिद्ध सरोवर के पास की सड़क - तीन मंदिर




कुंभकोणम में वेद पाठशाला बहुत पुरानी है ।

कुंभकोणम के पास की कावेरी नदी - नहर से अधिक नहीं (शुरुआती अप्रील में)

नागापट्टिणम - वेलंकण्णी


नागापट्टिणम् का वो बीच जहां सुनामी का सबसे अधिक असर हुआ -

वेलंगणी बीच पर अब-सब बराबर दीखता है ।

यहाँ से १० किलोमीटर उत्तर में प्रसिद्ध दरगाह शहर नगर है जबकि दक्षिण में ईसाई केन्द्र वेलंगण्णी ।
वेलंगण्णी का Basilica Church


यह सोलहवीं सदी में पुर्तगीज़ लोगों द्वारा बनाए गए चर्च के स्थल पर बनी नई इमारत है जहाँ मैं त्रिवेन्द्रम से आए एक जोड़े से मिला ।

बात करने के लिए

यहाँ तमिळ के अलावे अंग्रेज़ी ही काम देगी । हाँलांकि पानीपुरी बेचने वालों से हिन्दी में बात कर सकते हैं जो इलाहाबाद और कानपुर से आए हैं ।

भाई - अण्णा (भूल के भी तंबी मत कहिये)
क्या, कैसे - एन्ना, एप्पडी
कितना समय - एत्तणा मणिक्की
कब - एप्पो
खाना - साप्पडा
बस किधर मिलेगी - बस एंगे वरिगै






Friday, 4 March 2016

Sprint to Himachal-Punjab border

A quick tour near Bhakra-Nangal Dam on the Punjab-Himachal Pradesh border.


पंजाब-हिमाचल सीमा पर भाखड़ा-नगल बाँध यूँ तो भारत का सबसे ऊँचा नदी बांध है लेकिन इसकी रचना के अंदर तक जाना हम जैसे नागरिकों की सुविधा-सूची में शामिल नहीं । लेकिन जो नसीब में है - वो है गोबिंदसागर झील । प्राकृतिक पहाड़ों के बीच बना, कोई ५०० वर्ग किलोमीटर में फैले इस झील के एक तरफ़ पंजाब है तो दूसरी तरफ़ हिमाचल ।

भाखड़ा-नंगल बांध हेतु बना गोबिंद सागर झील


झील के किनारे बनी अस्थाई दुकानों में तली हुई मछली और मक्के की रोटी न छोड़ने लायक है । नयना देवी का मंदिर और आनंदपुर साहिब का केसगढ़ गुरुद्वारा दोनो, अलग-अलग दिशओं में २० किलोमीटर की दूरी पर हैं । पर्यटकों को जान लेना चाहिए कि शाम के चार बजे के बाद नंगल बाँध-क्षेत्र से नयना देवी के मंदिर का रास्ता सुरक्षा कारणों से बन्द कर दिया जाता है । लेकिन गुरुद्वारे से होकर जाने वाला रास्ता तब भी खुला रहता है ।

आनंदपुर साहिब


यह गुरुद्वारा सन् १६७५ में बनाया गया था, दसवें गुरु गोबिंदसिंह जी द्वारा । यहाँ से मुग़ल शासन से लोहा लेने की शपथ खाई गई थी । यह गुरुद्वारा शहर के एक ऊँचे टीले पर बना हुआ है । साथ ही लगा है लंगर और सराय ।

आनंदपुर साहिब गुरुद्वारे का सराय (धर्मशाला)


गुरुद्वारे का सराय (सरां) रहने के लिए उपयुक्त जगह । सौ रुपये प्रतिरात का किराया, एक भारतीय स्तर के ठीक-ठाक साफ़-सुथरे कमरों वाला । इसके ठीक पास में लंगर है जहाँ मुफ़्त भोजन भी उपलब्ध है । सराय की रजाई तो जाड़े के लिए अचूक उपाय थी ।

नंगल बाँध


नंगल स्टेशन और शहर एकदम छोटा और वीरान सा । आनंदपुर साहिब से कोई 30 किलोमीटर दूर ।

नंगल स्टेशन - एकदम वीरान, उत्तर भारत के लिए एक आश्चर्य 

नंगल बाँध के अन्दर जाने की इजाज़त तो हम जैसे साधारण लोगों को नहीं है, लेकिन गोबिन्दसागर झील आप घूम सकते हैं । झील प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच घिरा हुआ है । इसके किनारे कहीं-कहीं खाने की दुकानें हैं जहाँ मक्के की रोटी और तली हुई मछलियाँ बहुत अच्छी हैं ।

तली मछलियों की दुकान


नंगल बाँध और गोबिन्दसागर झील के किनारे रहने की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन दिन में इसके चारो ओर घूमा जा सकता है । झील बहुत सौम्य और शांत वातावरण वाला । इसके ही दूसरी ओर है प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर जो पहाड़ी पर है ।

नयना देवी मंदिर


झील के दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश की सीमा में पड़ने वाले नैना देवी मंदिर जाने के लिए कोई ५०० सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं । इन सीढ़ियों पर दुकानें हैं और करतबबीन भी ।

अगजर साँप वाली 

इस साँप को अपने बदन पर रखिये और Facebook या WhatsApp पर खटाक से शेअर कीजिये । इसके लिए आपको कोई २० रुपये देने होंगे ।

इन इलाक़ों में आने पर पंजाबी भाषा आपको हर तरफ़ सुनाई देगी । "ओ गया सी", "कित्थे जाणा आपनूँ जी" जैसे वाक्य सुमाई देंगे । उत्तर भारतीयों के  लिए बहुत मुश्किल तो नहीं । बस जी, और 'न' की जगह 'ण' का प्रयोग करते रहिये । जैसे, जाना है को "जाण्णा है जी" कहिये । 

इन तीनों जगहों पर जाने के लिए गरमियों में एक दिन और जाड़े में दो दिन लगते हैं ।

Wednesday, 16 December 2015

A Desi in Singapore - Primer

This blog is for all desis willing/thinking/planning to come to Singapore. What they should expect and plan.
Singapore Harbour

सिंगापुर, भारत की नज़रों में एक विकसित एशिया की झलक - पैसे, शॉपिंग, सफ़ाई, व्यवस्था । सिंगापुर एक शहर भर का देश है, 40x30 किमी के आकार का । इससे पहले कि मैं अपना मुँह और आपका दिमाग़ खोलूँ, दो ही शब्द - व्यवस्था और सतही ।
सिंगापुर

हाँ, ये बहुत व्यवस्थित है लेकिन -चीनी संस्कृति को छोड़कर बाकी सब - आदर्शों पर खड़े उतरने की नाकाम कोशिश मात्र । चाहे वो विचारों का खुलापन, खानपान की शैलियों में यथार्थ या फ़िर लोगों का व्यवहार - पश्चिम के अनुकरण की कोशिश मात्र है । दो महीने रहने पर ये बातें साफ़ होतीं हैं । ऐसा नहीं है कि यहाँ कुछ नहीं मिलता हो, लेकिन अगर आसपास का हो तो उतना अपनापन नहीं और अगर पश्चिम का तो बहुत महंगा । अगर आपको यहाँ रहने के अच्छे ख़ासे पैसे न मिल रहे हों तो कोई मतलब नहीं है यहाँ आने का । सबकुछ व्यवस्थित है, लेकिन सब कुछ सतही । इस सतह के अन्दर झाँको तो व्यवस्था झाँकने नहीं देती ।

एक बस-स्टॉप का नज़ारा

Things that you'd love:

यहाँ आम जीवन के लिये सब कुछ मौजूद है - साफ़ सड़कें, अस्पताल, सस्ती मेट्रो और बसें, दुकानें और बचत के पैसों को भारत भेजने पर आमदनी । सुरक्षा की दृष्टि से एकदम सही जगह है । रात के ३ बजे भी आप टैक्सी में आराम से बैठ सकते हैं - अकेली लड़की भी । बसें और ट्रेन समय पर चलती है - उनकी frequency भी अच्छी हैं । भारतीयों को यहाँ दिमागी लोगों के रूप में ही देखा जाता है - जैसे अन्य पश्चिमी देशों  में । लेकिन पश्चिम में भारतीयों को कंजूस या किफ़ायती भी समझा जाता है, यहाँ उतना नहीं ।

सिंगापुर के फूड कोर्ट - दोपहर में सबसे खाली रहते हैं
अगर आप चीनी खाने के शौकीन हैं तो यहाँ सब जगह मिलता है - सस्ते दामों में । लेकिन ये चीनी खाना भारत में मिलने वाले चायनीज़ रेस्तरॉँ के taste से कहीं बेस्वाद और नीरस होता है । इसलिए भारतीय मोमो या गोबी मंचूरियन की कल्पना मत कीजिएगा ।

Things that feel new to you:

महंगा बहुत है । ज़ाहिर है कि यहाँ बहुत कम चीजें देश के अन्दर बनती हैं - तो बाहर से मँगाने पर महंगी हो जाती हैं । शीशा, चीनी मिट्टी के बरतन, इलेक्टॉनिक्स इत्यादि सभी । भारत के मुकाबले कपड़े यहाँ डेढ़ गुणे दामों पर मिलते हैं । वैसे तो हम भारत में ही कपड़ों के बढ़ते दामों को लेकर परेशान हैं ।

सबसे अलग है यहाँ के फ़ूड कोर्ट । शुद्ध शाकाहारी खाना तो कम ही मिलता-बिकता है लेकिन अल्प मांसाहारी खाना मिल सकता है । अधिकांश लोग, अधिकांश समय बाहर खाते हैं - फूड कोर्ट में । ताजा और शाकाहारी खानों की कमी झलकती तो है लेकिन जुगाड़ हो जाता है । यहाँ की नौकरियाँ बौद्धिक और सेवा क्षेत्रों में बहुत है । इस तरह ये आपको एक बौद्धिक स्पर्धा और श्रेष्ठतम सेवा का अवसर देता है, लेकिन एक स्पर्धा का हिस्सा मात्र बनाकर छोड़ता है ।

होक्कियन नूडल
इस पर ये बता देना ज़रूरी समझता हूँ कि ये नूडल तो हर दुकान में मिलती है और ये दुकानें हर आबादी के पास के चौराहे और मॉल में, लेकिन अगर आप ब्रेड-ऑमलेट जैसी चीज़ कहीं ढूंढने निकले तो आपको १० किलोमीटर या ५०० रूपये ख़र्च करने पड़ सकते हैं । हालांकि अगर आप ब्रेड-आधा उबला हुआ अंडा खाना चाहें तो सब जगह हाज़िर रहेगा । आधे उबले हुए अंडे, अंदर से liquid रहते हैं ।

What you should learn
अगर आप यहाँ हैं तो चीनी भाषा और मलय-चीनी संस्कृति, मार्शल आर्ट आदि की क्लासेज़ ले सकते हैं । या लोगों से इस बारे में बात कर सकते हैं ।

संस्कृति

संस्कार में चीनी तत्व सबसे अधिक दिखता है - लोगों का खाना, दुकानदारों का दोनो हाथ जोड़कर पैसे वापस करना, लोगों का रात में नहाना इत्यादि इसके कुछ उदाहरण हैं । सबसे मज़ेदार है यहाँ की अंग्रेज़ी, जिसमें चीनी स्वर (accent) तो है ही, चीनी भाषा की तरह एकदम कम व्याकरण भी ! खाने के आम दुकान में चल रहे इस संवाद पर ध्यान दीजिए -

Do you have noodle soup? - Have!
And, do you have chicken rice? - Also have.
Do you have thai food? - No have.

सवालों के जवाब देखिये, कितने संक्षिप्त हैं - यहाँ आम लोगों से अंग्रेज़ी बोलने का यही तरीक़ा है । पूरे लम्बे वाक्य या जटिल प्रश्न पूछने का कोई फ़ायदा नहीं । अंग्रेज़ी ही सब जगह बोली जाती है, लेकिन भयानक चीनी (एशियाई) accent के साथ ।

इतिहास और भूगोल के नाम पर एकदम शून्य है; लेकिन चीनी नववर्ष (फरवरी के शुरु में) और अगस्त के भूतों के पर्व पर कुछ सांस्कृतिक अनुभव मिल जाता है । दीपावली और ईद (दोनों) के दिन छुट्टियाँ होती है इसलिए हिन्दू और मुस्लिम समुदाय अपने उत्सव मनाते हैं । इसके अलावे बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस की भी छुट्टियाँ होती हैं । भूगोल के नाम पर ५० मीटर उँची सड़क को भी बुकित (यानि पहाड़ी) के नाम से बुलाया जाता है ।

रहन-सहन और खर्च

यहाँ पर घर का किराया आपके खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा है, कुल ख़र्च के आधे या दो-तिहाई से भी अधिक । सफ़र करना, खाना (चीनी शैली) जैसी चीज़ें सस्ती है । मनोरंजन की चीजें - सिनेमा, खेलना, पार्टी-पब और घूमना ख़ासी महंगी । कपड़े और FMCG (शैम्पू, पेस्ट, डिटरजेंट) सामान थोड़े महंगे - सभी तुलना भारत के दामों से है ।  भारतीय खाना छोड़ सकने लायक महंगा ।

कुछ भाषागत समझ

सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा अंग्रेज़ी और चीनी है । चीनी भाषा के कुछ शब्द जो मैने यहाँ सीखे -

 नहीं - बेओ ,  हाँ - शी ।
मैं - वा, तुम - नी, वो - ता

संबंध दिखाने के लिए दॉ/तो का इस्तेमाल होता है । जैसे, मेरी पेंसिल - वा दॉ पेंसिल ।

लेकिन इसे बोलते समय accent या pitch का बहुत ध्यान रखना पड़ता है ।


वैसे आपको बता दें, यहाँ मलय भाषा भी बहुत समझी जाती है; तमिळ अपेक्षाकृत बहुत कम । निस्संदेह इस लेख मात्र से आपको पूरी जानकारी नहीं मिल सकती । लेकिन जानते रहिये, ढूंढते रहिये...

अन्त में

आने लायक जगह, रहने लायक जगह लेकिन बसने लायक नहीं । अगर कुछ देर के लिए आए हों तो खुले दिमाग़ से आइये अजनबियों से मिलिये, जानिये और सीखिये । उसके बाद .. फुर्रर्र.. । अन्त में इतना ही कहूँगा कि अगर अत्यधिक पैसे ना मिल पा रहे हों तो यहाँ रहने का ख़ास फ़ायदा नहीं ।



Saturday, 3 October 2015

Lake Toba And Batak People - Sumatra, Indonesia



A trip to Lake Toba in sumatra. Lake has an Island of the size of Singapore and is populated by Batak people.

तोबा झील का समोसीर द्वीप - बाईं ओर द्वीप और दाहिनी ओर मुख्य भूमि
उत्तरी सुमात्रा में ज्वालामुखी झील तोबा एक प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है । सुमात्रा के उत्तर में मेदान हवाई अड्डे से १५० किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम । झील के बीच समोसीर द्वीप है जो आकार में सिंगापुर देश के इतना बड़ा है । इस द्वीप पर कई गेस्ट हाउस हैं जो 4-5 दिनों की छुट्टी, शांति से बिताने के लिए उपयुक्त हैं । जान लें कि झील 440 मीटर गहरी है ।

पारापत बाज़ार में पान बेचती महिला । पान का स्थानीय नाम पता नहीं कर पाया  ।
यहाँ बताक प्राग्वासियों का घर है - ये बात तो आपको इंटरनेट पर पढ़ने पर मिल जाएगी । जो बात नहीं मालूम वो ये कि यहाँ पान भी मिलता है । हाँ, पान !  लेकिन स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं मालूम नहीं । सुमात्रा को स्थानीय भाषा में Sumatera लिखते हैं - सुमातेरा ।


जाने के लिए मेदान से ट्रेन लेकर सियांतर और फिर वहाँ से पारापत (तिग्गा राजा हार्बर) और शा के सात बजे आख़िरी नाव लेकर समोसीर द्वीप के (टुक-टुक) तक जा सकते हैं ।  दिन में एक ही ट्रेन मेदान से पारापत के निकट सियांतर को जाती है, दिन के १ बजे के आसपास । सियांतर से टैक्सी या मिनी बस में परापत आया जा सकता है । टैक्सी वाले पैसेंजर के भरने से पहले टैक्सी नहीं चलाते । आप मेदान से पारापत की सीधी बस या टैक्सी भी ले सकते हैं । इस सीधी टैक्सी का किराया, ५लाख रुपिया होगा (इंडोनेशिया की मुद्रा रुपिया, भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य २५०० रु हुआ. सितंबर २०१५) ।


Medan Airport से झील तक आने का रास्ता । 

 यहाँ पर चर्चों की संख्या, मुझे लगता है, इंडोनेशिया के किसी और इलाकों के मुकाबले सबसे अधिक है । मुख्यतः कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट हैं । जहाँ कैथोलिक को Katolik लिखते हैं, वहीं प्रोटेस्टेंट को Protesten । इन दोनों नामाकरणों में डच प्रभाव आसानी से गोचर होता है ।
झील के समोसीर द्वीप पर बने कॉटेज । पृष्ठभूमि में द्वीप के पहाड़ ।

बतक लोग और संस्कृति


बतक यहाँ के मूल निवासी हैं जो आज से कोई २०० साल पहले तक आदमखोर हुआ करते थे; आज वे बहुत मित्रवत हैं । जो चीज बहुत भाती है वो है उनका लकड़ी पर बनाया शिल्प ।


शिल्प में मुखौटे तीखे नैन-नक़्श वाले हैं - इनकी अपनी शक्लों से अलग ।

इनकी कला में छिपकिली जैसे जीव का दर्शन कई बार होता है । जो कलाकृति बनाई जाती है, मुख्यतः महोगनी की लकड़ी पर और ऐसा लगता है कि मैने दक्षिण प्रशांत महासागर के किसी द्वीप पर भी ऐसी कृतियाँ देखी हैं, लेकिन ध्यान नहीं आ रहा कहाँ ।

बताक कलाकृतियों में राजा-रानी के प्रतिमान ।
इसके अलावे यहाँ लोग कपड़ों की बुनाई का काम भी करते हैं । पर्यटकों के हेतु बनी दुकानों में ख़ासकर दिखते हैं ।

National Geographic के शायद २००१ जून के अंक में मैने पढ़ा था कि बताक लोग एक सदी पहले तक भी नरभक्षी थे । साथ ही मार्कोपोलो ने दक्षिणी सागर में जिन जनजातियों का ज़िक्र किया था - वो शायद बताक ही थे । इनके राजकाज संबंधी  बैठक का स्थान अब तक द्वीप पर देखा जा सकता है ।
बताक राजा का सभास्थल

पारापत बाज़ार


पापापत बाज़ार - किसी अत्यंत छोटे भारतीय शहर के हाट की तरह है ।
पारापत इलाका तो छोटा है लेकिन जनसंख्या ख़ासी दिखती है । भाषा न बोल पाने के कारण कुछ बात नहीं कर सकता । सूखी मछलियाँ, थोड़े फल, सब्ज़ियाँ और घरेलू सामान बहुत मिलते हैं यहाँ ।
पारापत बाज़ार में सूखी मछलियों की दुकान


इंडोनेशिया विकसित नहीं है, लेकिन देखने लायक, शांत लोगों से भरे द्वीपों का देश है । छुट्टियों के ८-१० दिन गुज़ारने के लिए बहुत उपयुक्त - परिवार के साथ । और विवरण फिर कभी, विदा !

अधिक तस्वीरों के लिए यहाँ जाएं - इनमें झील, गलियों और बोट पर  bikes के साथ मछलियों के transport की झलक मिलेगी । अगर पसंद आए तो comment करना मत भूलियेगा ।


Monday, 21 September 2015

Prayaan - encouraging travel


I have realized that many central Indians don't travel so much. Here is an advice.

आखिर भारत के मध्यवर्ती इलाकों के लोग - मध्य वर्गीय, अंग्रेज़ी ना के बराबर बोलने वाले - विदेश क्यों नहीं जाते? विदेश यात्रा के बारे मे कुछ चीजें जो आपको पता होनी चाहिएं यहाँ लिख रहा हूँ।

इसका बहुत बड़ा कारण हैं - विदेशों  की जानकारी कम होने से पैसे अधिक ख़र्च होने की संभावना । अंग्रेज़ी को विदेश (विलायत) की भाषा समझना और स्थानीय भाषा के सिवा कुछ और समझने में झिझक ।

इतना अवश्य ध्यान में रखें कि कहीं भी हाथ की मुद्रा, भाव भंगिमा और कम शब्दों में बयान कर देने की क्षमता  ही आपको दुनिया में आगे ले जा पाएगी । एकदम अच्छी अंग्रेजी आपको एयरपोर्ट और अमेरिका-इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के लिये ही आवश्यक है । अन्यथा नहीं !

बाहर की दुनिया देखिए - कहीं गाड़ियाँ तेज़ भागती हैं (पश्चिमी देश), कहीं लोग बहुत मददगार हैं (दक्षिणी यूरोप, इंडोनेशिया) तो कहीं का खाना अच्छा है । अगर आप थोड़ा पढ़ें को कम पैसों और परेशानी में दुनिया घूमी जा सकती है ।

वो देश जहाँ अच्छी अंग्रेज़ी बोलने भर से काम चल जाएगा

भाषागत सुझाव 


ये दिमाग़ से हटा दें कि अच्छी अंग्रेज़ी ही आपको विदेश में चंगा रख पाएगी । उपर के नक्शे में आप देख सकते हैं कि कितने कम देशों में आप बिना सहायता के, सिर्फ़ अच्छी अंग्रेज़ी बोलकर, अपने आप घूम सकते हैं । निस्संदेह इसके अलावे कई देश हैं जहाँ आपको, कम से कम पर्यटक स्थलों पर कोई दिक्कत नहीं होगी । जैसे - इटली, नेडरलैंद्स, अर्जेंटीना, कनाडा, मलेशिया इत्यादि । लेकिन अमेरिका जैसे देशों के कई क्षेत्रों और मार्केटों के लिए आपको एक अलग accent सीखने की आवश्यकता होगी । लेकिन, इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि आप बाहर ना निकलें । ज़रूर निकलें और लोगों को जानें, बात करें और ग़ौर करें । हाथ की मुद्रा, भाव भंगिमा और कम शब्दों में बयान कर देने की क्षमता का सहारा लें ।

भारत के आसपास के देशों में हिन्दी, बांग्ला या तमिळ पर्याप्त है, लेकिन हाथ की मुद्रा और भाव-भंगिमा के अलावे कम-से-कम शब्दों में दुकानदारों से बात करें । कन्फ़्यूज़न कम होती है ।

तीन किसम के विदेश हैं -

  • भारत के आसपास (अफ़ग़ानिस्तान से श्रीलंका तक), 
  • अंग्रेज़ी बोलने वाले देश (ब्रिटेन, अमरीका, ऑस्ट्रोलिया के अलावे सिंगापुर), और 
  • अंग्रेज़ी न जानने वाले (कई सुंदर और सभ्य देश)

इसके अलावे एक और चीज़  - अगर शाकाहारी खाना ढूंढने में दिक्कत हो रही हो तो भी प्रयास करें, मिल जाएगा ।

निकलिये, बाहर की दुनिया देखिये । व्यापार, ज्ञान और मन को बहलाने की असीम संभावनाएं हैं । दुनिया की संस्कृति को जानिये । कहीं अगर ५-७ दिनों  के लिये ही जा रहें हों तो अपने काम के अलावे स्थानीय संस्कार पर भी ध्यान दीजिये । अगर अधिक दिनों के लिए जा रहे हों तो स्थानीय लोगों से दोस्ती कीजिये ।

और अगर इतने पर भी बाहर जाने का हौसला न बन पाए, तो अपने देश में ही, अपनी भाषा और संस्कृति से अलग क्षेत्रों में घूमें । बच्चों की जानकारी, मनोरंजन और सेहत के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है घूमना ।


इन चीज़ों को जान लीजिये - इलेक्ट्रिक प्लग या सॉकेट किस प्रकार का है । विदेश जाने पर आपका पहचानपत्र सिर्फ आपका पासपोर्ट है । इसके अतिरिक्त कुछ ख़ास नहीं - पैन कार्ड जैसे भारतीय डॉक्यूमेन्ट किसी ख़ास काम के नहीं । ड्राइविंग लाइसेंस कुछ देशों में गाड़ी चलाने के लिए कुछ दिनों तक काम दे सकता है । ये भी जान लीजिये कि सड़के के किस ओर गाड़ी चलाते हैं - बाईँ या दाईं ।

घूमते रहिये - जानते रहिये ।

Saturday, 18 July 2015

Most commonly interpolated sounds


ऐसी कुछ ध्वनियाँ जो कई बार एक-दूसरे की जगह प्रयुक्त होती हैं; या संधि करते वक़्त एक-दूसरे में बदल जाती हैं ।

I have compiled some sounds of speech (Phonemes) that get approximated most often. I am NOT a linguist at all; however I'd be glad to see experts' comment on any inconsistency, they might observe.


क्या आपने किसी को युवा को जुवा बोलते हुए सुना है, या शिकागो को चिकागो बोलते सुना है? अगर हाँ, तो ये blog आपके लिये लिखा जा रहा है । आपको मालूम है कि मध्यकाल के विशाल तुर्क साम्राज्य को अंग्रेज़ी में Ottoman कहते हैं जबकि हिन्दी-उर्दू में उस्मानी, ऐसा क्यों ? इसमें ये बताया जाएगा किए ऐसे interpolation अन्य किन भाषाओं में देखने को मिलते हैं । इस लेख में उच्चारण के लिए उचारना इस्तेमाल किया गया है ।

नागरी वर्ग के अन्दर


सबसे पहले तो ये जान लें कि देवनागरी और अन्य भारतीय वर्णमालाओं में व्यञ्जन वर्गों (क,च,ट,त,प) के पहले और तीसरे अक्षरों में बहुत समरूपता है । पहले, अक्सर तीसरे में बदल जाते हैं । दूसरे और चौथे में भी इसका प्रयाण होता है, लेकिन अपेक्षाकृत कम । जैसे, दिक - दिग्गज में बदल जाता है, और उत - उदभव में ।

इनको एक साथ इस सूची में रखा जा सकता है = क -ग, च-ज, प-ब, ट-ड, त-द इत्यादि । इनके बारे में और जानकारी संधि के नियमों को जानकर ली जा सकती है । यद्यपि ऐसे प्रयाण विदेशी भाषाओं में भी लगभग हर जगह होते हैं, ये पृष्ठ ऐसे साफ़गोचर ध्वनियों के लिये नहीं बनाया गया है ।

इतना ध्यान में रखें कि दक्षिण भारत की तरह लगभग संपूर्ण विश्व में वर्गों के दूसरे और चौथे वर्णों का प्रयोग नहीं के बराबर होता है । यानि, (ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, फ, भ) - ये वर्ण दुनिया की सारी वर्णमालाओं में बहुत कम में पाए जाते हैं । जहाँ अरब ख़ और ह अधिक कंठ्य उच्चारित करते हैं, वहीं मराठी में 'झ' का उच्चारण zz ध्वनि की तरह होता है ।


नागरी वर्ग के पार


लेकिन वर्गों के अन्दर के बदलाव के अलावे भी वर्णों में कई वर्तन (morphing) होते हैं - क-च-ग, ज-ग-ह, क़-च इत्यादि । हम आगे इनके बारे में जानेंगे ।

व्यंजन अंतरण -

  • क ~ च  - उदाहरण के लिए ऋक् -ऋचा को लीजिये । संस्कृत में शोक - शोचति में बदल जाता है । इसी तरह  English Letter Ch को च की तरह उचारते हैं, जैसे च्वाइस (Choice) में; और C को क की तरह (Cord) । ऐसा प्रयोग इटालियन में सबसे प्रमुखता से मिलता है जहाँ कुछ vowel (स्वर; e, i ) के पहले आने वाले cc को च की तरह और अन्यथा क की तरह बोलते हैं । इनके अपने नियम हैं जो अंग्रेजी से अधिक स्थाई हैं ।  जैसे 'मोनिका बेलुच्ची' को Belucci लिखते  हैं, जिसे अनजाने में बेलुक्की भी पढ़ा जा सकता है । इसी तरह बोफ़ोर्स कांड में फँसे Ottavio Quattrocchi का उदाहरण है । 1
    अलग उच्चारण में जीभ की स्थिति (मोटे तौर पर) - समान ध्वनियों के उच्चारण स्थान निकट हैं ।
  • च ~ स - ये तमिळ में कई जगहों पर देखने को मिलता है । मूल तमिळ में स की ध्वनि के लिए च  (ச) अक्षर का ही इस्तेमाल होता है । जैसे सिवा (शिव) को लिखने के लिए चिवा  (சிவ)लिखा जाता है, हाँलांकि पढ़ते है सिवा । लेकिन यही अक्षर च ध्वनि के लिये भी प्रयुक्त होता है; जैसे दसवीं सदी का प्रसिद्ध साम्राज्य - चोळ (சொழ)। इसके अलावे असमी में भी  চ, एक ही अक्षर,  च और स के लिए इस्तेमाल होता है ।  यही अक्षर पड़ोसी बाँग्ला में केवल 'च' की ध्वनि के लिए इस्तेमाल होता है ।
  • च ~ श - ग़ौर कीजिये कि अंग्रेज़ी में ch कभी 'च' और कभी 'श' की तरह उचारे जाते हैं । जैसे choke - चोक, chute - शूट  । ऐसा फ्ऱांसीसी प्रभाव के कारण लगता है । फ्ऱेंच में तो 'Ch' को श ही बोलते हैं; जैसे Chocolate को शॉकलात पढ़ते हैं । लगभग ऐसा ही अरबी में भी देखने को मिलता है जहाँ चाय को शाय उचारा जाता है । ध्यान रहे कि अरबी वर्णमाला में 'च' की ध्वनि होती ही नहीं है । ऐसा ही उच्चारण आप नेपाल और आसपास के लोगों के बोलने में भी पा सकते हैं । 
  • य ~ ज - बिहार और बंगाल के कई लोग य को ज से उचारते है, जैसे योग को जोग । लेकिन सिर्फ बंगाल में ही नहीं, दुनिया में और भी कई संस्कृतियों में इसका चलन है । जैसे - येरुशलम~जेरुशलम में, और यूसुफ़ ~ जोसेफ़ में भी इसकी छाप आपको मिलेगी । इसके अलावे इंडोनेशिया और वियतनाम में भी अंग्रेज़ी के अक्षर (y) को ज से उच्चारित किया जाता है । योग्याकार्ता (Yogyakarta) का स्थानीय उच्चारण जोग्जकार्रता है ।
  • थ ~ स - आपने कभी किसी नेपाली या उत्तरपूर्व के व्यक्ति को (Three) थ्री बोलते हुए सुना है । अक्सर वो श्री जैसा कुछ बोलते प्रतीत होते हैं (कम से कम मुझे) । चीनी भाषियों की बोलचाल में भी अंग्रेजी के 'Thank you' को 'शैंक यू' जैसा कुछ सुनने को मिलता है । आपको मालूम है कि इस्तांबुल में केंद्रित विशाल तुर्क साम्राज्य को अंग्रेज़ी में उस्मानी नहीं कहते है; Ottoman कहते हैं ।  यहाँ Uthman, Usman के लिए इस्तेमाल होता है । इसी प्रकार हदीस को अंग्रेज़ी में Hadith लिखते हैं । क्या translation के लेशन में भी ऐसा ही संदेश है? मैं तो नहीं जानता इसके आगे ।
  • ह ~ ग - H/G. सबसे पहला उदाहरण तो संस्कृत शब्द Maha और लैटिन Mega की समानता से मिलता है । हिन्द-आर्य भाषाओं के विद्वान इतने मात्र से ख़ुश हो जाएंगे । लेकिन यहाँ आपको बता दें कि ये रूपवर्तन Tamil में भी उतनी ही आसानी से गोचर होता है । तमिळनाडु के गाँवों में (हाँ, सिर्फ़ गाँवों में ही) हिमांशु को गिमांजु पढ़ा जा सकता है । कहीं अंग्रेज़ी में इन अक्षरों (G,H) के एक-दूसरे के आसपास रहने का यही राज़ तो नहीं ? संधि का एक उदाहरण - संस्कृत में स्नेह - स्निग्ध में बदलता है, दुह-दुग्ध में और मोह-मुग्ध में । सहोदर-सगा के संबंध का भी यही मूल हो सकता है । बोलचाल की तमिळ में महाशिवरात्रि को मगाशिवरात्रि कहा जाता है ।
  • H~Kh - अरबी में जहाँ उष्म ध्वनियों की बहुतायत है (हिन्दी के मुकाबिले) यह स्थांतरण देखने को मिलता है । उष्म ध्वनियाँ उनको कहते हैं जिनमें बोलने के समय हवा एकदम सँकरे रास्ते से गुज़रती है । जैसे श बोलने में या ष या ह बोलने में ।  Hebrew का Halet - अरबी में Khalid बन जाता है ।
  • क़ ~ च - ये 'क' और 'च' वाले वर्तन से थोड़ा अलग है । यहाँ अरबी में ख्यात 'क़' का अंतरण 'च' में होता द्योत है । स्पेनिश में Q को च उचारा जाता है, जबकि अरबी में क़ (जैसे रक़ीब में - Raqeeb) । इस बात का असर स्पेनिश-पुर्तग़ाली उपनिवेशों और आसपास की भाषाओं के शब्दों में मिलता है । जैसे कि स्पेनिश में अरबी का मस्जिद - मेस्चिता बन जाता है जिसे Mesquita लिखते हैं । यही अंग्रेज़ी तक आते-आते Mosque बन जाता है । इसी प्रकार चीन के क्यांग (Qiang) को च्यांग पढ़ा जाता है । दक्षिण-पूर्व एशिया में भी यही चलन है । बर्मा की प्रसिद्ध नेता आंग सान सूची की अंग्रेज़ी Ang San Su Qui होती है जिसकी वजह से, ग़लती से लोग उन्हें आंग सान सूकी भी कह देते हैं ।
  • स~ज़ - शब्दशः जो विसन (Vision) दिखे उसको विज़न कहना । इसी प्रकार क्रियाओं के अन्त में Visualisation को Visualization जैसा पढ़ते-लिखते हैं ।
  • ग~ज - ऐसा अरबी में बहुत देखा जाता है जहाँ ग नहीं होता । तो 'ग' से बनने वाले शब्दों में 'ज' डाल दिया जाता है - ऐसे शब्द, विदेशी भाषाओं से लिये जाते हैं । जैसे गैब्रिएल (Gabriel) को जिब्राइल कहा जाता है । अंग्रेज़ी में भी G अक्षर का दोनों इस्तेमाल होता है - Get और Gene में । मिस्र की अरबी में जमाल को Gamal लिखा जाता है, हाँलाकि उच्चारण जमाल ही होता है ।
  • ल~र - प्रमुख उदाहरण चीनी भाषा में थ्रो- स्लो वाली जोड़ी से । पहले 'थ'~'स' बना और 'र'~'ल' । इसके अलावे पोलिश में मार्ग्रेट को Malgorzata लिखते हैं जहाँ पहले 'र' की जगह 'ल' का उच्चारण होता है । जापानी में इसका ठीक उल्टा होता है जहाँ 'ल' होता ही नहीं है । अतः बाहरी भाषाओं से आए ऐसे शब्दों में जहाँ 'ल' होते हैं, र से बदल दिए जाते हैं । यानि वहाँ इंग्लिश को इंग्रिश और लोशन को रोशन कहा जाएगा ।
  • क ~ ग - तमिळ नामों में विनायक, प्रायः विनायगा बन जाता है । इसी तरह जिसे अंग्रेजी में कैट (Cat) कहते हैं, उसे स्पेनिश में Gata कहा जाता है । लेकिन देवनागरी के एक ही वर्ग में स्थित होने के कारण अधिक आश्चर्य नहीं ।


स्वर अंतरण

  • ओ ~ उ - फ़ारसी में गुल को गोल उचारते हैं । इसी तरह ख़ुदा को ख़ोदा और सुख़न को सोख़न कहने का चलन है । दोनों ही ह्रस्व स्वर हैं ।
  •  ऐ ~ ई - ये भी फ़ारसी, अरबी जैसी भाषाओं में देखने को मिलती है । ग़ैर और ग़ीर दोनो को एक जैसा ही लिखा जाता है । इसी प्रकार ए और इ में भी अंतरण देखा जाता है; जैसे गेसू ~ गिसू ।

स्वर से व्यञ्जन

  • u ~ v - संस्कृत और  Arabic जैसी भाषाओं में गोचर होता है । संस्कृत में मनु से मानव बनता है, और रघु से राघव । अरबी में नूर~अनवार बनता है, जहाँ अ शुरु में आया और ऊ की मात्रा व में तब्दील हो गई ।  ध्यान दीजिये कि अरबी में व और ऊ के लिए एक ही अक्षर इस्तेमाल होता है - वाव (و) ।
  • ई ~ य - संस्कृत में और अरबी में  ऐसा देखने को मिलता है । संस्कृत में संधि- संध्या बनती है । इसी तरह इ से अंत होने वाले शब्द स्वर संधि में य में बदल जाते हैं । अरबी में इन दोनों ध्वनियों के लिए एक ही अक्षर इस्तेमाल में आता है - या (ي) । लेकिन इसी प्रकार अंग्रेजी का y भी य और ई दोनों के काम आता है - जैसे rosy और you में ।
इसके अलावे कई स्थानों में ध्वन्यंतरण उनके आस-पास की भाषाओं के संपर्क में आने से स्पष्ट देखने-सुनने को मिलती हैं ।
ऐसी कई ध्वनियाँ उनके उच्चारण के लिए प्रयुक्त होने वाले मौखिक स्थान के आसपास होने के कारण एक-दूसरे में बदल जाती हैं । इसका अधिक उल्लेख इस लेख में देखें (अंग्रेज़ी में) । लेकिन इससे अधिक व्याख्या मेरे वीक्षण-विश्लेषण से परे है, आपकी नज़र में कुछ और विश्लेषण हो तो ज़रूर लिखिएगा ।

लेकिन सावधान - ये सभी आँकड़े भारतीय, यूरोपीय, शामी और एशियाई भाषाओं से लिए गए हैं, जिनका संपूर्ण ज्ञान मुझको बिल्कुल भी नहीं है । एफ़्रीक़ी और लातिन एमेरिकी मूल भाषाओं के ज्ञाता इस पर और प्रकाश डाल सकते हैं, मैं उनके बारे में कुछ भी नहीं कह सकता, कुच्छ भी नहीं । इनके बारे में जो भी आधारभूत संक्षिप्त जानकारी चाहते हों, शुरुआत के लिए विकिपीडिया के इस लेख पर देख लें (अंग्रेज़ी में)।

वैसे ये सब लिखने का मतलब क्या है?


जब भाषाविद, ख़ुद इन सब (और इससे कहीं अधिक) को जानते हैं, तो ये लिखने का मतलब क्या है ? मेरा उद्देश्य सिर्फ़ एक observation प्रस्तुत करना था; कोई सिद्धांत नहीं । और ये पर्यवेक्षण किसी और सिद्धांत को जन्म दे सकता है - सही नज़र वाले को । मेरी नज़र ऐसी नहीं, किसी की तो होगी !

वैसे ये लिखने का एक उद्देश्य, इस विषय में रोचित ऐसे पाठकों तक पहुँचना भी था जो ये जान लें कि कभी भी उपरोक्त सूची से अलग की ध्वनियाँ वर्तित नहीं होतीं । जैसे 'ज' कभी 'ल' में नहीं बदलता । या 'श' की ध्वनि कभी 'प' में नहीं बदलती, इत्यादि । अगर आपको ऐसा नहीं लगता तो कृपया मुझे और बाक़ी पाठकों को भी बताएं ।



1 ये बात ग़ौर कीजिये कि जर्मन, रूसी सहित अन्य पूर्वी यूरोपीय भाषाओं में क की ध्वनि के लिए K का ही इस्तेमाल होता है । रूसी में C का इस्तेमाल सिर्फ़ S (स) की ध्वनि के लिए होता है । इसलिये जिसे हम सोवियत संघ कहते थे, उस सोवियत ज़माने के किसी झंडे में USSR के लिए CCCP लिखा हुआ मिलेगा - इसको रोमन में SSSR पढ़ेंगे ।